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श्री राम के जीवन पक्षों से प्रेरणा प्राप्त कर श्रद्धालुओं में आत्मिक जाग्रति और आंतरिक शुद्धि की यात्रा का शुभारंभ करने हेतु दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा 15 से 21 जनवरी 2025 तक प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में ‘महाकुंभ 2025’ में भव्य ‘श्री राम कथा’ का आयोजन किया गया। इस सात दिवसीय कथा ने भक्तों को एक अलौकिक यात्रा का अनुगामी बनने का सुंदर अवसर प्रदान कर 144 वर्षों उपरांत आने वाले ‘महाकुंभ’ की भव्यता व पवित्रता का दर्शन करवाया।

Shri Ram Katha at Mahakumbh, Prayagraj: A transformative saga of dharma, compassion, and universal harmony organized by Divya Jyoti Jagrati Sansthan

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) की शिष्या व विश्व विख्यात कथा व्यास साध्वी श्रेया भारती जी ने ‘सनातन धर्म’ के सनातन विज्ञान द्वारा शाश्वत अध्यात्मका अनुभव कराने हेतु एकत्रित हुए स्थानीय गणमान्य अतिथियों, प्रतिष्ठित हस्तियों व विश्व भर से आए भक्तों की विशाल सभा के समक्ष अध्यात्म के गूढ़ तथ्यों को प्रस्तुत किया| मंत्रोच्चारण, भक्ति भाव से ओत-प्रोत भजनों व ‘महाकुंभ’ की दिव्य आभा ने श्री राम कथा की आध्यात्मिकता में चार चाँद लगादिए कि उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए यह कार्यक्रम एक आत्म-विभोर करने वाली यादगार बन गया।

साध्वी श्रेया भारती जी ने श्री राम जी के जीवन व शिक्षाओं में निहित गूढ़ आध्यात्मिक तथ्यों को उजागर कर भक्तों को उन्हें अपने जीवन में स्थापित करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने समझाया कि रामायण में उल्लिखित श्री राम जी का जीवन सदाचारी व उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए एक कालातीत मार्गदर्शक है। उनका ज्ञान आध्यात्मिक सिद्धांतों का पालन करते हुए व्यक्तिगत, पारिवारिक व सामाजिक कर्तव्यों के सामंजस्यपूर्ण संतुलन पर बल देता है।

Shri Ram Katha at Mahakumbh, Prayagraj: A transformative saga of dharma, compassion, and universal harmony organized by Divya Jyoti Jagrati Sansthan

साध्वी जी ने समझाया कि श्री राम भक्ति व ज्ञान का समन्वय सिखाते हैं। श्री राम ने भक्तिमति‘शबरी’ के विनम्र प्रसाद को बिना किसी भेदभाव के स्वीकार किया। यह अधिनियम दर्शाता है कि भगवान भौतिक प्रसाद के स्थान पर भक्ति व हृदय की पवित्रता को अधिक महत्त्व देते हैं।

‘महाकुंभ’ की आध्यात्मिकता को उजागर करते हुए साध्वी जी ने समझाया कि ‘महाकुंभ’ भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जो देवत्व व मानवता के संगम का प्रतीक है। जहाँ भौतिक ‘त्रिवेणी संगम’ में पवित्र स्नान जैसे बाह्य अनुष्ठान महत्वपूर्ण हैं, वहीं स्थायी आध्यात्मिक परिवर्तन हेतु आंतरिक ‘त्रिवेणी संगम’ में गोता लगाना अत्यावश्यक है। यह हमें स्मरण करवाता है कि परम तीर्थ इस मानव देह के भीतर है जहाँ परमात्मा का वास्तविक निवास स्थान है। साध्वी जी ने बताया कि भगवान राम का वास्तविक मंदिर हमारा हृदय है व पवित्र नदी भीतर दिव्य चेतना का प्रवाह है।

साध्वी जी ने निष्कर्षित करते हुए बताया कि श्री राम साक्षात् ‘ब्रह्मज्ञान’ के अवतार रूप में प्रकट हुए| जिन्होंने यह तथ्य समझा दिया कि सुख-दुःख, सफलता-विफलता में समभाव प्रदर्शित करते हुए संतुलित रहने का बल व समझ ब्रह्मज्ञान ही प्रदान करता है।

ब्रह्मज्ञान की साधना के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर दिव्य ऊर्जा के प्रवाह पर ध्यान केंद्रित कर दिव्यता के स्रोत से जुड़ जाता है अतः नकारात्मकता को दूर कर सद्भाव व शांति को अनुभव कर पाता है। ‘ब्रह्मज्ञान’ आधारित ध्यान से ही आत्म-साक्षात्कार और मुक्ति प्राप्त होती है। 

अंत में साध्वी जी ने सभी को एक पूर्ण तत्त्ववेत्ता सतगुरु से ज्ञान व मार्गदर्शन प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने सत्य पथ के जिज्ञासुओं को श्री राम के शाश्वत आदर्शों व ज्ञान, भक्ति और सर्वधर्मसद्भाव के प्रकाश को अपनाते हुए ‘महाकुंभ’ की आध्यात्मिक महिमा का आनंद लेने हेतु डीजेजेएस में आने का आमंत्रण दिया।

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