दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की अनुकंपा से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा लुधियाना, पंजाब में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य व दिव्य आयोजन किया गया। यह पावन आयोजन 19 से 25 फरवरी 2026 तक चला। यह सात दिवसीय कथा कार्यक्रम श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ने वाला रहा।

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी वैष्णवी भारती जी ने श्रीमद् भागवत कथा का गूढ़ मर्म श्रद्धालुओं के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण केवल इतिहास के पात्र नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक जीव के भीतर विद्यमान शाश्वत चेतना हैं। श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल कथाएँ नहीं, बल्कि आत्मा को जाग्रत करने वाले महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक संकेत व संदेश हैं।
इस कार्यक्रम में लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों से हज़ारों श्रद्धालु, साधक एवं जिज्ञासु सम्मिलित हुए। कथा का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में वंदन एवं आशीर्वाद की कामना के साथ हुआ। इसका उद्देश्य सार्वभौमिक शांति और व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति का आह्वान था।

साध्वी वैष्णवी भारती जी ने भागवत महापुराण में वर्णित गूढ़ आध्यात्मिक तत्वों को सरल भाषा में स्पष्ट किया। उन्होंने इन शास्त्रों की कालातीत प्रासंगिकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत केवल भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं को सुनने का माध्यम नहीं है बल्कि उसके दिखाए मार्ग पर चलते हुए भगवान की साक्षात अनुभूति प्राप्त करने का माध्यम है। यह संभव है केवल ब्रह्मज्ञान की उस शाश्वत विधि से, जिसे एक पूर्ण सतगुरु ही प्रदान कर सकते हैं।
उन्होंने अर्जुन के उदाहरण से वर्तमान जीवन की तुलना की। जिस प्रकार श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की भूमि पर द्वंद में फंसे अर्जुन का मार्गदर्शन किया, वैसे ही आज के जीवन में भी व्यक्ति मानसिक संघर्षों से जूझता है। यदि जीवन में कोई पूर्ण गुरु न हो, तो व्यक्ति दिशाहीन हो जाता है। साध्वी जी ने सरल उदाहरणों और तर्कपूर्ण विश्लेषणों द्वारा यह समझाया कि सतगुरु की कृपा से आत्मबोध और शाश्वत शांति प्राप्त की जा सकती है।
प्रवचनों के साथ प्रस्तुत भजन-संकीर्तन ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। संगीतमय प्रस्तुतियों ने न केवल श्रद्धालुओं के हृदयों को छू लिया, बल्कि उन्हें आत्ममंथन हेतु प्रेरित भी किया। उन्होंने जीवन के परम सत्य की खोज में रुचि दिखाई और ब्रह्मज्ञान प्राप्ति की दिशा में अग्रसर होने का संकल्प लिया।
कई श्रद्धालुओं ने डीजेजेएस की सामाजिक पहलों की भी सराहना की। उन्होंने नि:स्वार्थ भाव से कार्यरत स्वयंसेवकों के अथक प्रयासों की प्रशंसा की, जो गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन में आत्मसमर्पण से सेवारत हैं।
इस दिव्य आयोजन को मीडिया द्वारा भी व्यापक कवरेज प्राप्त हुई। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया ने इस कथा की भव्यता, शिक्षाओं और आध्यात्मिक वातावरण को उजागर किया।
यह पावन कथा न केवल श्रद्धालुओं को शास्त्रीय ज्ञान के निकट लाई, बल्कि उन्हें ब्रह्मज्ञान द्वारा शाश्वत ध्यान अपनाने के लिए प्रेरित भी किया। यह आयोजन डीजेजेएस के आध्यात्मिक एवं सामाजिक जागरूकता के अभियान में एक और महत्वपूर्ण अध्याय बना।