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भक्तों को दिव्य ज्ञान प्रदान करने व भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं में निहित प्रेरणा के अनमोल मोतियों को देने के लिए 'दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान' की एसबीएस नगर शाखा द्वारा 1 से 7 मई, 2024 तक पंजाब के रूपनगर में श्रीमद्भागवत कथा का विलक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस कथा का उद्देश्य उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान श्री कृष्ण की वास्तविक भक्ति और उससे मिलने वाले नैतिक मूल्यों को प्रदान करना था।

Shrimad Bhagwat Katha enlightened the divine path to transformation at Rupnagar, Punjab

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक व संचालक, डीजेजेएस) की शिष्या, साध्वी कालिंदी भारती जी ने 'श्रीमद्भागवत पुराण' के सनातन ज्ञान पर प्रकाश डाला। इस कथा के अंतर्गत आध्यात्मिक प्रवचनों के साथ-साथ डीजेजेएस के गायक शिष्य-शिष्याओं द्वारा प्रस्तुत सुमधुर भक्ति-गीत और भजन भी शामिल थे। रूप नगर में आयोजित इस सात दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम के दौरान स्थानीय गणमान्य अतिथियों और भक्तों ने अपनी उपस्थिति से इस अवसर की शोभा बढ़ाई।

कथा व्यास जी ने दिव्य प्रेम और आत्म-साक्षात्कार की खोज पर बल देते हुए मानव जीवन के उद्देश्य को समझाया। उन्होंने श्री कृष्ण के प्रति गोपियों के अनन्य दिव्य-प्रेम से उत्पन्न शुद्ध भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाते हुए रास-लीला के दिव्य-अलौकिक महत्व को विस्तार से समझाया। साध्वी जी ने धर्म, कर्म और भक्ति के सिद्धांतों पर आधारित जीवन जीने के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने समझाया कि कैसे भगवान श्री कृष्ण की शिक्षाएँ आज भी प्रासंगिक हैं| उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को व्यक्तिगत और सामाजिक कल्याण के लिए इन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। भगवान श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं का सजीव व भक्तिपूर्ण वर्णन सुनकर भक्त मंत्रमुग्ध हो गए।

Shrimad Bhagwat Katha enlightened the divine path to transformation at Rupnagar, Punjab

सारतः कथा व्यास जी ने समझाया कि 'ब्रह्मज्ञान' आधारित ध्यान के नियमित अभ्यास से ही व्यक्तिगत परिवर्तन संभव हो पाता है। यह व्यक्तिगत परिवर्तन ही फिर वैश्विक परिवर्तन का आधार बनता है।

कार्यक्रम का समापन शांति और सद्भाव के लिए सामूहिक प्रार्थना, आरती व प्रसाद वितरण के साथ हुआ। कार्यक्रम को वहां उपस्थित सभी लोगों से अपार प्रशंसा मिली। गूढ़ एवं सारगर्भित-भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने भक्तों के हृदयों पर अमिट प्रभाव छोड़ा।  लोगों ने अपने आध्यात्मिक लक्ष्य को पहचाना और उसे प्राप्त करने के लिए अग्रसर हुए।

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