गीता जयन्ती के पावन अवसर पर दिव्य ज्योति वेद मन्दिर द्वारा १ दिसम्बर २०२५ को एक आध्यात्मिक रूप से समृद्ध वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें आदिगुरु शङ्कराचार्य द्वारा रचित " गीता माहात्म्य" के कुछ सारगर्भित श्लोकों का गायन शैली में शुद्ध उच्चारण सिखाया गया । कार्यक्रम का दिव्य केन्द्र बिन्दु वे श्लोक ही नहीं, बल्कि उनके सम्पूर्ण अर्थ, उनके आन्तरिक सन्देश और जीवन-उद्धारक तत्त्वों का गहन विश्लेषण था, जिसे सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या, साध्वी दीपा भारती जी ने अत्यन्त भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया।

साध्वी जी ने स्पष्ट किया कि जब साधक वैराग्य, विवेक और पवित्र भाव से गीता का अध्ययन करता है तथा उसके उपदेशों को जीवन में उतारता है, तब वह भय, पाप और बन्धनों से मुक्त होकर मोक्ष के पथ पर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि जैसे प्रतिदिन का जल-स्नान शरीर को पवित्र करता है, उसी प्रकार गीता को आत्मसार करना आत्मा को निर्मल बनाता है। उन्होंने सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की शिक्षाओं को स्मरण कराते हुए कहा कि “गीता को सुगीता बनाना है”—अर्थात् गीता को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि उसे हृदय में उतारना है; क्योंकि श्रीमद्भगवद्गीता कोई सामान्य ग्रन्थ नहीं, बल्कि स्वयं भगवान श्री कृष्ण की मुख से निकली वाणी है।
समापन में साध्वी दीपा भारती जी ने सभी साधकों से इस पावन गीता जयन्ती पर एक दृढ़ संकल्प लेने का आह्वान किया—कि वे सेवा को अपने जीवन का स्वभाव बनाए, क्योंकि गुरुदेव की सेवा ही परम धर्म, परम कर्म और परम मार्ग है, जो मनुष्य को साधारणता से उठाकर दिव्यता की ओर ले जाता है। इस दिव्य कार्यक्रम में लगभग २५० लोगों ने भाग लिया।
