दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज के महिला विकास प्रकोष्ठ, प्रगति, के विशेष आमंत्रण पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डी.जे.जे.एस) के महिला सशक्तीकरण एवं लैंगिक समानता प्रकल्प, संतुलन ने एक विशेष कार्यशाला का आयोजन कर महिला विकास प्रकोष्ठ के 2026-27 के शैक्षणिक सत्र का 30 सितम्बर 2026 के दिन किया उद्घाटन । ‘टाइमलेस दिवाज़’ विषय पर आधारित इस कार्यशाला में महिलाओं के सशक्तीकरण के प्रति संतुलन प्रकल्प के विशिष्ट दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया गया, जिस में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत को महिलाओं की पहचान, नेतृत्व क्षमता और आत्मसम्मान से जुड़े समकालीन विचारों के साथ जोड़ा गया।

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या एवं डी.जे.जे.एस संतुलन की वैश्विक प्रमुख साध्वी दीपिका भारती जी ने इस सत्र का संचालन किया। उन्होंने सोशल मीडिया के दौर में महिला सशक्तीकरण के व्यापक स्वरूप पर युवा छात्राओं के साथ विचार-विमर्श किया। साध्वी जी ने रोचक गतिविधियों के माध्यम से सोशल मीडिया के दौर में युवा महिलाओं पर सुंदरता, फैशन और जीवनशैली से जुड़े अनेक बाहरी प्रभावों से जुड़े ट्रेंड को सामने रखा जो कई बार अनेक युवा महिलाओं में तुलना, असमंजस और आत्म-संदेह को जन्म देते हैं। उनकी आकांक्षाओं तथा क्षमताओं के बावजूद उनमें अपर्याप्त होने का भाव उत्पन्न कर सकते हैं | भारतीय इतिहास की प्रेरणादायी महिलाओं के जीवन प्रसंगों पर आधारित केस स्टडी के माध्यम से उजागर किया की सच्चा आत्मविश्वास दूसरों जैसा बनने में नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं को पहचानने और अपनी विशिष्टता को स्वीकार करने में निहित है।
भारत की प्रगतिशील विरासत से प्रेरणा लेते हुए साध्वी जी ने साँझा किया की किस प्रकार विभिन्न युगों में महिलाओं ने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दिया और समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। रानी लक्ष्मीबाई और रानी वेलु नाचियार जैसी वीरांगनाओं; कनकलता बरुआ और रानी गैदिन्ल्यू जैसी क्रांतिकारियों; भगिनी निवेदिता और मीरा अल्फासा जैसी समाज सुधारकों तथा मैत्रेयी और रानी मदालसा जैसी वैदिक विदुषियों के जीवन यापन ने यह स्पष्ट किया कि किसी महिला की गरिमा और क्षमता का निर्धारण सामाजिक अपेक्षाओं के आधार पर नहीं किया जा सकता। दूसरों से मान्यता पाने या पुरुषों के समकक्ष स्वयं को सिद्ध करने के बजाय, इन महान विदुषी नारियों ने दृढ़ विश्वास, उद्देश्यपूर्ण जीवन और अपने वास्तविक व्यक्तित्व के अनुरूप जीने की स्वतंत्रता का उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया।

साध्वी जी ने आगे बताया कि अपने आंतरिक स्वरूप से सचेत जुड़ाव युवा महिलाओं को अपनी अंतर्निहित क्षमताओं को पहचानने,सोशल मीडिया के युग में भ्रामक विचारों और वास्तविकता के बीच अंतर करने, अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने का साहस विकसित करने के लिए सिद्ध एवं अति आवश्यक उपाय है । वर्त्तमान समय में भी महिलाएँ हिंसा, भेदभाव और सामाजिक रूढ़ियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में विवेकपूर्ण, संवेदनशील और निर्भीक प्रवृत्तियों को अपने व्यक्तित्व में उजागर करने लिए आध्यात्मिक जागरण ही एकमात्र आधार बन सकता है | इस समग्र विकास से ही महिलाओं में व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन दोनों में अधिक स्पष्टता, आत्मविश्वास और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने की सक्षमता बनती है। कार्यशाला में भारतीय इतिहास की प्रेरणादायी महिलाओं के जीवन पर आधारित उदाहरणों के माध्यम से इस विचार को विस्तार से समझाया गया।
कार्यशाला की सराहना करते हुए प्रगति की अध्यक्ष विधि वर्मा और उपाध्यक्ष तनिष्का ने छात्राओं की ओर से अपने विचार साँझा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया, परस्पर विरोधी विचारधाराओं और सफलता की लगातार बदलती परिभाषाओं के दौर में इस कार्यशाला ने महत्वाकांक्षा, व्यक्तिगत पहचान और आत्मसम्मान को देखने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया। साथ ही, सहयोगी दबाव को समझने और उससे निवारण के व्यावहारिक सुझावों के उदाहरणों ने छात्राओं को बाहरी अपेक्षाओं से परे जाकर अपनी रुचियों, क्षमताओं और लक्ष्यों के अनुरूप निर्णय लेने की कला को सीखा । दौलत राम कॉलेज के महिला विकास प्रकोष्ठ, प्रगति की संयोजक डॉ. मालविका सिंह ने डी.जे.जे.एस संतुलन के प्रकल्प तले चलाये जा रहे ऐसे क्रांतिकारी प्रयासों की भूरी प्रशंसा करते हुए साध्वी दीपिका भारती जी का अभिवादन करते हुए रेखांकित किया कि विभिन्न पीढ़ियों की महिलाओं ने सामाजिक, सांस्कृतिक और लैंगिक चुनौतियों का सामना किया है। इसके बावजूद, अपने वास्तविक स्वरूप और अंतर्निहित सामर्थ्य को पहचानने की चेतना एक ऐसा शाश्वत तत्व है, जो सभी युगों की महिलाओं को जोड़ता है। इस प्रकार, कार्यशाला ने इतिहास में महिलाओं के संघर्षों और आज की जेन ज़ी पीढ़ी की युवा महिलाओं के सामने मौजूद चुनौतियों के बीच एक सार्थक संबंध स्थापित किया |
विभिन्न अभियानों के माध्यम से डी.जे.जे.एस संतुलन वर्तमान पीढ़ी को लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण जैसे विषयों के प्रति अधिक जागरूक एवं समावेशी समझ विकसित करने के लिए प्रेरित करता है । दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की 21 वीं सदी की वैदिक नारीयों के निर्माण हेतु समर्पित दूरदर्शी दृष्टिकोण से प्रेरित संतुलन प्रकल्प आध्यात्मिक जागरण और समग्र विकास के माध्यम से महिलाओं को मानसिक एवं शारीरिक अधीनता और सामाजिक रूढ़ियों से ऊपर उठने के लिए विभिन्न प्रकल्पों जैसे कॉरपोरेट संगोष्ठियों, लाइव वेबिनार, शैक्षणिक संस्थानों में कार्यशालाओं, ग्रामीण महिला सशक्तीकरण कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों, सामुदायिक सहभागिता परियोजनाओं, जनसंपर्क यात्राओं के माध्यम से निरंतर कार्यरत है । संतुलन का विश्वास है जब महिलाएँ एक-दूसरे के संघर्षों को गहराई से समझती हैं, तो सामाजिक, बौद्धिक और आर्थिक संसाधनों से संपन्न महिलाएँ दूसरों के सशक्तीकरण प्रयासों में सार्थक योगदान दे सकती हैं। आपसी संवेदना, सहयोग और एकजुटता ऐसे समाज के निर्माण के लिए आवश्यक हैं, जहाँ महिलाएँ गरिमा, आत्मविश्वास और समान अवसरों के साथ एक-दूसरे की प्रगति में सहभागी बनें।बड़े स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से संतुलन भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जमीनी स्तर पर सार्थक प्रभाव उत्पन्न कर रहा है। इसके कार्यक्रमों ने प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और कॉरपोरेट संगठनों में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है।
दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की दिव्य दृष्टि से प्रेरित होकर डी.जे.जे.एस शिक्षा, लैंगिक संवेदनशीलता, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक स्वास्थ्य, आपदा राहत और कैदियों के पुनर्वास जैसी विविध सामाजिक सुधार पहलों के माध्यम से सार्वभौमिक शांति, समानता और बंधुत्व की स्थापना के लिए निरंतर कार्यरत है।
संतुलन का कार्य केवल प्रत्यक्ष कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। अपने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से @DJJSSantulan विश्वभर में महिला उत्थान और सशक्तीकरण के प्रति जागरूकता एवं प्रेरणा का प्रसार कर रहा है। अधिक जानकारी और नवीनतम गतिविधियों से जुड़े अपडेट के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर @DJJSSantulan को फॉलो करें।
