पिछले लगभग 20 सालों से बोध ( यानी “जागरूकता”) — जो दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) का नशा उन्मूलन कार्यक्रम है — प्रिवेंटिव एजुकेशन, कम्युनिटी मोबिलाइजेशन और अवेयरनेस कैम्पेन्स के जरिए हर व्यक्ति और कम्युनिटी को मजबूत बना रहा है, ताकि लोग एक हेल्दी और अधिक कॉन्शियस लाइफस्टाइल अपना सकें।

इसी शानदार सफर को आगे बढ़ाते हुए और 'नशा-मुक्त भारत' के नेशनल विजन को तेज रफ्तार देने के लिए, DJJS बोध ने YPSS (युवा परिवार सेवा समिति) के साथ मिलकर 16 फरवरी 2025 को कुंभ मेले में SANKALP Campaign – Drug-Free India (2025–2029) का लॉन्च किया। इसे एक फोकस्ड और अलग-अलग फेज़ (चरणों) में चलने वाले एक बड़े अभियान की तरह तैयार किया गया है ताकि—सही जागरूकता (awareness), बचाव, अच्छी काउंसलिंग और सभी के सपोर्ट के साथ मिलकर नशे की प्रॉब्लम को दूर किया जा सके। 4 मजबूत कदमों पर बने इस कैंपेन का विज़न एकदम क्लियर है: अगले 5 सालों में 25 लाख लोगों तक पहुंचना और समाज में एक बड़ा बदलाव लाना।
आज, जब संकल्प अपना पहला साल (अप्रैल 2025 – मार्च 2026) पूरा कर रहा है, तो इस कैंपेन में सॉलिड प्रोग्रेस और लोगों का बढ़ता हुआ पार्टिसिपेशन साफ दिख रहा है।

इस साल, संकल्प ने 348 प्रोग्राम किए और 4,56,740 लोगों तक अपनी पहुँच बनाई, जिससे पहले ही साल में इसके 5-साल के आउटरीच विज़न का लगभग 18.27% टारगेट पूरा हो गया। इस कैंपेन ने 68 DJJS ब्रांचों के जरिए उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, दिल्ली, असम, झारखंड, गुजरात, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, जम्मू और कश्मीर, और तेलंगाना सहित 16 राज्यों में फैलकर इस कैंपेन ने एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (स्कूल/कॉलेज), वर्कप्लेसेस, हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म्स और कम्युनिटीज तक अपनी पहुंच बढ़ाई।
संकल्प के पहले साल की सबसे बड़ी ताक़त इसका 126 इंस्टिट्यूशंस के साथ इसकी साझेदारी रही, जिनमें 109 स्कूल, 8 कॉलेज और यूनिवर्सिटीज, और 9 हॉस्पिटल, कॉर्पोरेट और सोशल ऑर्गेनाइजेशन शामिल थे। इन कोलैबोरेशन्स की वजह से समाज के अलग-अलग हिस्सों में प्रिवेंटिव अवेयरनेस और सही लाइफस्टाइल के बारे में खुलकर बातचीत हो पाई, जिससे एक स्वस्थ माहौल बनाने में कम्युनिटी का पार्टिसिपेशन और भी ज्यादा मजबूत हुआ।
इस कैंपेन ने अवेयरनेस को रियल एक्शन में बदल कर दिखाया, जिसके लिए कई अलग-अलग इनिशिएटिव्स लिए गए, जिनमें कम्युनिटी अवेयरनेस प्रोग्राम्स, मास सेंसिटाइजेशन ड्राइव्स, यूथ अवेयरनेस वर्कशॉप्स, काउंसलिंग और ट्रीटमेंट सपोर्ट, ट्रेनिंग वर्कशॉप्स और वर्कप्लेस अवेयरनेस प्रोग्राम्स शामिल थे। इन सारे प्रयासों ने लोगों और कम्युनिटी के लिए एक ऐसा स्पेस बनाया, जहाँ वे प्रिवेंशन, हेल्दी चॉइसेस और लॉन्ग-टर्म वेलबीइंग जैसे ज़रूरी मुद्दों पर खुलकर मीनिंगफुल बातचीत कर सकें।
बोध की 'अंदर से जागने' की फिलॉसफी से जुड़कर, इस कैंपेन ने यह समझाया कि एडिक्शन (लत) का मतलब सिर्फ नशीली चीजों तक सीमित नहीं है। तंबाकू और शराब के खिलाफ जागरूकता फैलाने के साथ-साथ, संकल्प ने आज की नई चुनौतियों जैसे अनहेल्दी आदतों और 'डिजिटल डिपेंडेंसी' (फोन और स्क्रीन की लत) पर भी फोकस किया। सबसे अहम बात, इसमें शामिल होने वाले लोगों को यह समझाया गया कि एक एडिक्शन-फ्री लाइफ का मतलब सिर्फ बुरी आदतों से दूर रहना नहीं है—बल्कि इसका असली मतलब खुद में अवेयरनेस, सेल्फ-कंट्रोल, इमोशनल रेजिलिएंस (मानसिक मजबूती) और अपनी जिंदगी के लिए हेल्दी चॉइसेस को अपनाना है।
इस साल का आउटरीच ‘संकल्प’ के 'फोर-पिलर फ्रेमवर्क' (Four-Pillar Framework) के जरिए आगे बढ़ा। इसके हर फेज़ में एडिक्शन प्रिवेंशन (लत से बचाव) और बिहेवियरल ट्रांसफॉर्मेशन (आदतों में पॉजिटिव बदलाव) के अलग-अलग डायमेंशन्स पर फोकस किया गया—जिसमें वैल्यू-बेस्ड इंस्पिरेशन और नशे से दूरी से लेकर, सेल्फ-रिफ्लेक्शन (खुद को समझना) और 'माइंडफुल लिविंग' तक सब कुछ शामिल था।
इस कैंपेन के मोमेंटम को तब और भी मजबूती मिली, जब अलग-अलग फील्ड्स के लोगों ने इसमें पार्टिसिपेट किया और इसे एनकरेज किया। इनमें पब्लिक रेप्रेज़ेंटेटिव्स, यूनिवर्सिटी लीडरशिप, डॉक्टर, प्रिंसिपल, काउंसलर, एडमिनिस्ट्रेटर, पुलिस ऑफिसर, एजुकेशनिस्ट और सोशल लीडर शामिल थे। इन सबका एक साथ आना यह साफ दिखाता है कि 'प्रिवेंटिव एक्शन' (यानी प्रॉब्लम को शुरू होने से पहले ही रोकने) के लिए समाज में हर तरफ से कितना बड़ा सपोर्ट मिल रहा है।
इस कैंपेन का इम्पैक्ट तब और भी मजबूत हो गया, जब इसमें पार्टिसिपेट करने वाले इंस्टीट्यूशंस और स्टेकहोल्डर्स की तरफ से ढेरों एप्रिसिएशन लेटर्स मिले।
इसके साथ ही, लोकल और नेशनल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—जैसे नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, अमर उजाला, आई-नेक्स्ट जागरण (iNext Jagran) और हंस इंडिया—पर इसे जबरदस्त कवरेज मिली। इस व्यापक स्तर की कवरेज ने कैंपेन के मैसेज को एक बहुत बड़ी कम्युनिटी तक पहुँचाया और एडिक्शन प्रिवेंशन (लत से बचाव) को लेकर लोगों के बीच होने वाली बातचीत को और भी ज्यादा मजबूत किया।
जैसे-जैसे संकल्प अपने 2029 के विज़न की तरफ आगे बढ़ रहा है, इसके पहले साल की अचीवमेंट्स नंबरो या आउटरीच तक ही सीमित नहीं हैं। बल्कि ये एक नेशनल मूवमेंट के बढ़ते हुए मोमेंटम को दिखाती हैं—एक ऐसा मुहिम जो लोगों को सशक्त कर रहा है, कम्युनिटी को एक साथ जोड़ रहा है, और एक हेल्दी और 'नशा-मुक्त भारत' की तरफ भारत के सफ़र को और भी ज्यादा मजबूत बना रहा है।
