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नशामुक्त भारत के निर्माण के राष्ट्रीय मिशन को आगे बढ़ाते हुए दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डी.जे.जे.एस.) ने अपनी ‘बोध’ पहल के अंतर्गत युवा परिवार सेवा समिति (YPSS) के सहयोग से अगस्त एवं सितंबर 2025 के दौरान देशभर के विभिन्न राज्यों में 22 प्रभावशाली जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया।

50,101 people across 22 Locations benefitted under Ek Yudh Apne Virud - an initiative of Sankalp Campaign (2025 - 2029)

‘एक युद्ध अपने विरुद्ध’ (A Battle Within) थीम पर आधारित यह अभियान इस तथ्य को रेखांकित करता है कि नशे के विरुद्ध असली संघर्ष बाहर नहीं, बल्कि मन के भीतर से प्रारंभ होता है। इसने समाज को यह प्रेरणा दी कि भावनात्मक निर्भरता, साथियों के दबाव, एवं आदतन व्यवहारों पर विजय पाने के लिए स्व-जागरूकता और आत्म-अनुशासन आवश्यक है।

कार्यक्रमों को दो प्रमुख प्रारूपों में आयोजित किया गया —

50,101 people across 22 Locations benefitted under Ek Yudh Apne Virud - an initiative of Sankalp Campaign (2025 - 2029)
  • कम्युनिटी अवेयरनेस प्रोग्राम्स, जिनके माध्यम से सीधे जन-जन तक संदेश पहुंचाया गया, तथा
  • मास सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम्स, जिन्होंने व्यापक जनसमूह को नशामुक्त जीवन के संदेश से जोड़ा।

प्रत्येक सत्र को एक अर्थपूर्ण एवं अनुभवात्मक यात्रा के रूप में तैयार किया गया जिसमें जानकारी, आत्ममंथन और सहभागिता का सुंदर संगम रहा। सत्रों की शुरुआत मनोरंजक एंकरिंग से हुई, जिसके पश्चात आकर्षक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति “आबाद रहे, आज़ाद रहे, हिन्दुस्तान हमारा” ने वातावरण को ऊर्जा से भर दिया। दीप प्रज्वलन समारोह ने अंधकार से जागरूकता की ओर बढ़ने का प्रतीकात्मक संदेश दिया।

विभिन्न शहरों में यह अभियान रैलियों, नुक्कड़ नाटकों एवं पार्क कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों तक पहुंचा। स्वयंसेवकों ने सार्वजनिक स्थलों, सड़कों और मोहल्लों में जाकर आत्म-संयम एवं सजग जीवनशैली का संदेश फैलाया, जिससे सामुदायिक स्तर पर भागीदारी की नई लहर देखने को मिली।

प्रतिभागियों को क्विज़, लाइव डेमो, स्किट्स एवं वीडियो प्रस्तुतियों के माध्यम से जोड़ा गया, जिनमें दिखाया गया कि नशे की जड़ें अक्सर भावनात्मक खालीपन, दिशाहीनता एवं साथियों के प्रभाव से उपजती हैं। ‘बोध स्किट’ और लघु फ़िल्म “आजादी – द रियल फ़्रीडम” ने यह समझाते हुए दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया कि सच्ची आज़ादी मन पर नियंत्रण में ही निहित है।
 ‘लिटमस टेस्ट’ और ‘प्लेज़र लूप’ जैसी गतिविधियों ने दिखाया कि क्षणिक सुख किस प्रकार दीर्घकालिक बंधन में बदल सकता है। पंकज महाजन और प्रदीप जैसे व्यक्तियों की वास्तविक जीवन कथाओं ने आत्मजागृति से हुए जीवन परिवर्तन की प्रेरक झलक प्रस्तुत की।

वे स्थान जहाँ ‘एक युद्ध अपने विरुद्ध’ अभियान के अंतर्गत 22 जन-जागरूकता कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित हुए:

राज्य

शाखा

स्थान / पता

हरियाणा

फरीदाबाद NIIT

बांके बिहारी गार्डन

उत्तर प्रदेश

मेरठ

ग्राम घोरिया, निकट मवाना, जिला मेरठ

हरियाणा

पानीपत

न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, सेक्टर-11

बिहार

दरभंगा

भगवानपुर, सीतामढ़ी

दिल्ली

नेहरू प्लेस

गीता भवन, मालवीय नगर

बिहार

सहरसा

पदमपुर, सहरसा

मध्य प्रदेश

मण्डला

मण्डला (MP-481661)

महाराष्ट्र

अमरावती

ग्राम लाखमापुर, ता. मंगरूल पीर, जिला करंजा लाड

महाराष्ट्र

चाकण

देशमुख अली, चक्रेश्वर मंदिर रोड, पुणे

पंजाब

होशियारपुर

जिला जेल, बंगड़ (ऊना, हिमाचल प्रदेश)

बिहार

भागलपुर

DJJS अलीगंज, गंगटी

बिहार

सहरसा

गमहरिया, मधेपुरा (852108)

उत्तर प्रदेश

गोरखपुर

गंगा पिपरा, खजनी

उत्तर प्रदेश

गोरखपुर

पंचायत भवन खैरतिया, फाजिलनगर, कुशीनगर

महाराष्ट्र

अमरावती

DJJS अमरावती आश्रम

राजस्थान

जोधपुर

सेक्टर-16, चोपासनी रोड

राजस्थान

जोधपुर

महाराणा प्रताप चिल्ड्रन पार्क

बिहार

दरभंगा

DJJS भगवानपुर, सीतामढ़ी

उत्तर प्रदेश

मेरठ

मेरठ शहर

मध्य प्रदेश

मण्डला

मण्डला टाउन

पंजाब

मोगा

गीता भवन चौक, मोगा

महाराष्ट्र

अमरावती

अमरावती ग्रामीण

अभियान में कुल 50,101 प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा इसे अनेक जनप्रतिनिधियों एवं विशिष्ट अतिथियों से सराहना प्राप्त हुई, जिनमें प्रमुख थे —
 श्री अमित नारंग (नगर पार्षद, पानीपत), श्रीमती सुनीता गोयल, श्री राजेश्वर चौधरी (सरपंच, भगवानपुर, सीतामढ़ी) तथा श्री आर.के. सुमन (निदेशक, साइंस कोचिंग सेंटर, मधेपुरा)।

कार्यक्रमों को अमर उजाला, दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान और पंजाब केसरी जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में विस्तृत कवरेज प्राप्त हुआ, जिसमें युवाओं की प्रतिज्ञा, सहभागिता और प्रेरक प्रवचनों को विशेष रूप से उजागर किया गया।

संकल्प – एक युद्ध अपने विरुद्ध’ के माध्यम से DJJS एवं YPSS ने पुनः यह संदेश दिया कि नशामुक्त भारत का मार्ग जागरूकता, आत्म-अनुशासन एवं सामाजिक रूपांतरण से होकर ही गुजरता है। इस अभियान ने हजारों लोगों में आत्मजागृति की लौ प्रज्वलित की — एक ऐसे भारत के निर्माण हेतु, जहाँ सच्ची स्वतंत्रता भीतर से प्रारंभ होती है।

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