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मुस्कान केवल चेहरे की खूबसूरती नहीं बढ़ाती, बल्कि यह अच्छे स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सम्मानजनक जीवन का भी प्रतीक है। लेकिन कई बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए दांतों का खो जाना एक ऐसी समस्या है, जो उनके रोज़मर्रा के जीवन को गहराई से प्रभावित करती है। दांत न होने के कारण वे भोजन को ठीक से चबा नहीं पाते, जिससे पोषण और पाचन से जुड़ी परेशानियाँ होने लगती हैं। साथ ही, बोलने में होने वाली कठिनाई उनके आत्मविश्वास को कम कर देती है और वे लोगों से खुलकर बातचीत करने में संकोच महसूस करने लगते हैं।

A 3-Day Denture Camp That Changed Lives - 82 Smiles Restored, 66 Villages Reached | Divya Dham | Aarogya & PGIDS, Rohtak

दांतों का झड़ना केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर व्यक्ति के मन और आत्मविश्वास पर भी पड़ता है। कई लोग अपने खोए हुए दांतों के कारण खुलकर मुस्कुराने से कतराने लगते हैं, उनका आत्मसम्मान कम हो जाता है और वे सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाने लगते हैं। धीरे-धीरे यह समस्या उनके संपूर्ण स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने लगती है।

दुर्भाग्य से, दंत उपचार की ऊँची लागत और विशेषज्ञ सेवाओं की सीमित उपलब्धता के कारण अनेक जरूरतमंद लोग समय पर उपचार नहीं करा पाते। इसी आवश्यकता को समझते हुए डी.जे.जे.एस. आरोग्य निरंतर करुणा और सेवा भाव के साथ ऐसे स्वास्थ्य कार्यक्रम चला रहा है, जो केवल दांतों का उपचार ही नहीं करते, बल्कि लोगों की मुस्कान, आत्मविश्वास और गरिमापूर्ण जीवन को भी वापस लौटाने का कार्य करते हैं।

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इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए, डी.जे.जे.एस. आरोग्य ने पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (पी.जी.आई.डी.एस.), रोहतक, हरियाणा के सहयोग से 18, 20 और 22 अप्रैल 2026 को दिव्य धाम केन्द्र दिल्ली में तीन दिवसीय निःशुल्क डेंचर शिविर का आयोजन किया। इस शिविर का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को दंत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर उनकी मुस्कान और आत्मविश्वास को वापस लौटाना था।

दिव्य धाम आश्रम केंद्र  के आसपास स्थित 66 से अधिक गांवों के ग्रामीणों की सेवा के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर का मुख्य फोकस उन बुजुर्गों पर था, जो दांतों के झड़ने, भोजन चबाने में परेशानी और उससे जुड़ी पोषण संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे। इन क्षेत्रों में कृत्रिम दांतों की सुविधा सीमित होने के कारण कई वरिष्ठ नागरिक आवश्यक दंत उपचार से वंचित रह जाते हैं। साथ ही, परिवार पर निर्भरता और बार-बार अस्पताल आने-जाने में कठिनाई भी उनके लिए बड़ी चुनौती होती है। इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, यह सेवा सीधे समुदाय तक पहुंचाई गई। सामान्य दंत शिविरों के विपरीत, जहां मरीजों को आगे के इलाज के लिए अन्य केंद्रों पर भेजा जाता है, इस विशेष पहल के तहत कृत्रिम दांतों से जुड़ी पूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गई। इसमें दंत जांच, माप लेना, कृत्रिम दांतों का निर्माण और उनकी अंतिम फिटिंग तक की सभी सेवाएं शामिल थीं। 18 अप्रैल 2026 को रोगियों के दांतों के इंप्रेशन लिए गए और 22 अप्रैल 2026 को शिविर के समापन दिवस पर उन्हें कृत्रिम दांत प्रदान किए गए। इस सुव्यवस्थित प्रक्रिया ने बुजुर्गों के लिए उपचार को अधिक सरल, सुविधाजनक और प्रभावी बनाया।

पी.जी.आई.डी.एस के साथ 2018 से चलाए जा रहे फ्री डेंटल कैंप को आगे बढ़ाते हुए यह तीन दिवसीय डेंचर शिविर एक नई पहल है। इस पहल का नेतृत्व पी.जी.आई.डी.एस. के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मंजुनाथ बी.सी. ने किया, जिनके साथ 16 अनुभवी डॉक्टरों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और प्रशिक्षकों की समर्पित टीम शामिल रही। टीम में प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, वरिष्ठ चिकित्सक तथा पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री विभाग के विशेषज्ञ भी शामिल थे। सभी के सामूहिक अनुभव और विशेषज्ञता के माध्यम से लाभार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली समग्र दंत चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की गईं।

शिविर के दौरान प्रदान की गई प्रमुख सेवाएं:

  • मुंह और दांतों की संपूर्ण जांच।
  • दांतों की स्थिति का आकलन कर उपयुक्त उपचार की योजना बनाना।
  • कृत्रिम दांत (डेंचर) तैयार करने के लिए माप (इम्प्रेशन) लेना और उनका निर्माण करना।
  • अनुभवी दंत चिकित्सकों द्वारा परामर्श प्रदान करना।
  • बेहतर दंत स्वास्थ्य के लिए मुंह और दांतों की स्वच्छता संबंधी आवश्यक जानकारी एवं मार्गदर्शन देना।

इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि लाभार्थियों को एक ही शिविर में पूरी और संवेदनशील दंत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। उन्हें आगे किसी भी प्रकार के फॉलो-अप के लिए पी.जी.आई.डी.एस. केंद्र जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी, जो कि अधिकांश बुज़ुर्ग रोगियों के लिए अक्सर कठिन और असुविधाजनक होता है। इस सुव्यवस्था के कारण प्रत्येक लाभार्थी को लगा कि उनकी बात सुनी गई, उनका ख्याल रखा गया और उन्हें महत्व दिया गया।

तीन दिनों तक चले इस विशेष शिविर से 82 से अधिक लोगों को लाभ मिला। कृत्रिम दांत मिलने के बाद कई लोगों की खाने-चबाने की क्षमता बेहतर हुई, बोलने में स्पष्टता आई और उनका खोया हुआ आत्मविश्वास लौट आया। कई बुज़ुर्गों के लिए यह सिर्फ दांत लगवाने का अवसर नहीं था, बल्कि अपनी मुस्कान और जीवन में फिर से आत्मविश्वास वापस पाने का एक अनमोल अनुभव था।

इस तीन दिवसीय डेंचर शिविर को मिली शानदार सफलता के बाद, यह निर्णय लिया गया है कि लोगों तक नियमित रूप से दंत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए ऐसे शिविर अब हर तीन महीने में आयोजित किए जाएंगे।

इन प्रयासों के माध्यम से डी.जे.जे.एस. आरोग्य स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, ज़रुरतमंद और वंचित लोगों को सम्मानजनक जीवन देने तथा उनके जीवन में नई उम्मीद और खुशियां लाने के अपने संकल्प को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। एक मुस्कान से शुरू हुआ यह बदलाव कई जीवनों में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।

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