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गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा संस्थापित दिव्य ज्योति वेद मंदिर एक शोध व अनुसंधान संस्था है जिसका एकमात्र ध्येय प्राचीन भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान द्वारा सामाजिक रूपांतरण करना है। वैदिक संस्कृति के प्रसार एवं वेदमंत्रोच्चारण की मौखिक परम्परा को प्रसारित करने तथा संस्कृत भाषा को व्यवहारिक भाषा बनाने हेतु दिव्य ज्योति वेद मंदिर देश भर में कार्यरत है। इसी कड़ी में वैश्विक महामारी COVID-19 के लॉकडाऊन अवधि में भी दिव्य ज्योति वेद मंदिर द्वारा विश्व स्तर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से शुक्लयजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी की नियमित कक्षाएं प्रारंभ की गई जिनमें वेद मंत्रों का विशुद्ध व सस्वर उच्चारणपाठ सिखाया गया। शुक्ल यजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी की कक्षा के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर 8 मई 2021 को बैच संख्या 4, 5, 6, 8, 10, 11, 12, 16, 17, 18 , 20 , 21, 23 तथा 24 का दीक्षांत समारोह तथा प्रशस्ति-पत्र वितरण का आयोजन किया गया।

Convocation Ceremony of 14 Rudri Paath batches | 8 May 2021

सुन्दर गुरु वंदना के गायन के माध्यम से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम में कई रोचक सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया । सभी ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम में समय समय पर रुद्राष्टाध्यायी के विभिन्न बैंचों के परिणामों को भी सभी के मध्य रोचक तरीके से घोषित किया गया। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के कई द्रढ़ संकल्पित वेदपाठी महानुभावों ने अपने अनुभवों को सभी के साथ साझा किया। विभिन्न प्रांतो के वेदपाठियों ने एक साथ ऑनलाइन प्लेटफार्म पर संस्कृत भाषा तथा रुद्रीपाठ के विषय में अपने विचारों एवं अनुभवों को अपनी भाषा में व्यक्त कर एक अनूठी मिसाल कायम की।

Convocation Ceremony of 14 Rudri Paath batches | 8 May 2021

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न प्रांतो में संचालित संस्थान की शाखाओं का संचालक साध्वी बहनों ने रुद्रीपाठ से सम्बंधित अपने अनुभवों तथा चुनौतियों को श्रोतागणों के सामने रखते हुए बताया की किस प्रकार लॉक डाउन जैसे तनावपूर्ण वातावरण में भी महाराज जी की कृपा से सभी को घर बैठे वेदपाठ का लाभ मिल पाया जिससे न केवल वेदपाठियों ने मंत्रोच्चारण सीखा अपितु तनाव एवं नकारात्मक परिस्थिति पर विजय प्राप्त की और शांति व सकारात्मकता का अनुभव किया।

अंत में साध्वी दीपा भारती जी ने कार्यक्रम को समापन की और ले जाते हुए वेद मन्त्रों को न केवल बोलने व श्रवण करने अपितु उन्हें समझ कर आचरण में लाने पर बल दिया । अंत में साध्वी जी ने इस बात पर जोर दिया की किस तरह कक्षाएं समाप्त होने के पश्चात भी वेद मंत्रों से सदैव जुड़े रहना एवं निरंतर अभ्यास करते रहना हमारा कर्तव्य है। कोरोना काल में भी महाराज जी द्वारा सेवादारों को घर बैठे रुद्रीपाठ की सेवाएं प्रदान करना एवं सभी का निष्ठा से संस्थान की इस ऑनलाइन सेवा में दृढ़ता एवं विश्वास से संलग्न रहना एक अनूठे गुरु शिष्य प्रेम की मिसाल को दर्शाता है। साध्वी जी ने अंत में सभी श्रोतागणों, प्रचारकों , गुरुभाई , गुरुबहनो एवं सेवादारों का आभार व्यक्त किया एवं शांति पाठ के पाठन के पश्चात कार्यक्रम को विराम दिया गया।

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