आज के तेज़ी से बदलते डिजिटल युग में बच्चे मोबाइल फोन, ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया में लगातार अधिक समय बिता रहे हैं, जिसका प्रभाव उनके एकाग्रता स्तर, शारीरिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। जो शुरुआत में सुविधा प्रतीत होता है, वही धीरे-धीरे एक गंभीर व्यवहारिक समस्या का रूप ले रहा है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम को शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट, नींद में बाधा, शारीरिक गतिविधि की कमी, चिंता और सामाजिक दूरी जैसे मुद्दों से जोड़ा जा रहा है। ऐसे में समय रहते जागरूकता और हस्तक्षेप पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

इस बढ़ती चुनौती को पहचानते हुए, डीजेजेएस बोध ने युवा परिवार सेवा समिति (वाईपीएसएस) के सहयोग से राष्ट्रीय अभियान संकल्प – नशा-मुक्त भारत अभियान (2025–2029) के अंतर्गत विद्यालय-स्तरीय जागरूकता कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की। ‘अनप्लगिंग’ पहल के अंतर्गत ये कार्यक्रम अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच 17 विद्यालयों में आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों तक पहुँच बनाई गई।
इन सत्रों को विशेष रूप से इस उद्देश्य से तैयार किया गया कि छात्र अत्यधिक स्क्रीन उपयोग के स्वास्थ्य, व्यवहार, एकाग्रता और आपसी संबंधों पर पड़ने वाले प्रभावों को समझ सकें तथा तकनीक के प्रति एक संतुलित और सजग दृष्टिकोण विकसित कर सकें। कार्यक्रमों का उद्देश्य तकनीक से दूरी बनाना नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण, सजग निर्णय-क्षमता और जिम्मेदार डिजिटल आदतों को प्रोत्साहित करना था, ताकि छात्र यह समझ सकें कि तकनीक का सर्वोत्तम उपयोग तभी संभव है जब वह सीमित और उद्देश्यपूर्ण हो।

सहभागी विद्यालयों की सूची:
- यशवंतराव चौहान माध्यमिक विद्यालय, पुणे
- सरस्वती विद्या मंदिर, चौखा, जोधपुर
- रूपा रव सेवड़ा महाविद्यालय, केरू, जोधपुर
- माध्यमिक विद्यालय, चौहानपुर, बुलंदशहर
- राजकृत 10+2 हाई स्कूल एवं मिडिल स्कूल, हरनौत, पटना
- टैगोर पब्लिक स्कूल, केरू
- रॉयल पब्लिक स्कूल, बरेली
- बी.एस.बी. एक्सीलेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पिथौरागढ़
- श्रीराम पब्लिक स्कूल, केरू
- OMG इंटरनेशनल स्कूल, केरू
- राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल, चौखा
- राजकीय संस्कृत विद्यालय, केरू
- सतगुरु पब्लिक स्कूल, सलोड़ी
- राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल, केरू
- राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल, महादेव नगर, केरू
- श्रीराम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सलोड़ी
- लक्ष्य अकादमी, चौखा
प्रत्येक सत्र को आयु-अनुकूल एवं सहभागितापूर्ण बनाया गया, जिसमें जागरूकता वार्ता, वास्तविक जीवन से जुड़े डिजिटल परिदृश्यों पर आधारित स्किट एवं रोल-प्ले, समूह गतिविधियाँ, क्विज़, ओम जप सहित माइंडफुलनेस अभ्यास तथा चिंतनात्मक संवाद शामिल थे। छात्रों ने मोबाइल उपयोग और गेमिंग से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए और स्वस्थ डिजिटल आदतें अपनाने का संकल्प भी लिया।
इस अभियान के माध्यम से 8,500 से अधिक छात्र एवं विद्यालय समुदाय के सदस्य लाभान्वित हुए। शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन ने छात्रों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन की पुष्टि की, जिसमें स्क्रीन टाइम के प्रति बढ़ी हुई सजगता, माइंडफुलनेस अभ्यासों में रुचि तथा दैनिक डिजिटल दिनचर्या में व्यावहारिक बदलाव की इच्छा स्पष्ट रूप से देखी गई।
‘अनप्लगिंग’ पहल को स्थानीय स्तर पर मीडिया का भी समर्थन मिला, जहाँ क्षेत्रीय प्रिंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से विद्यालयी बच्चों में डिजिटल अति-उपयोग की समस्या पर प्रकाश डाला गया। इस मीडिया कवरेज ने अभियान के संदेश को विद्यालयों से बाहर समुदाय तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘अनप्लगिंग’ पहल की सफलता यह दर्शाती है कि अनुभवात्मक शिक्षण और प्रारंभिक हस्तक्षेप, उभरती व्यवहारिक लतों से निपटने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं। डीजेजेएस बोध और वाईपीएसएस इस प्रयास के माध्यम से छात्रों को सजग डिजिटल नागरिक बनने के लिए सशक्त बना रहे हैं, ताकि वे तकनीक का उपयोग निर्भरता के बजाय सीखने, विकास और रचनात्मकता के साधन के रूप में कर सकें तथा संतुलित एवं स्वस्थ जीवनशैली अपना सकें।
अनप्लगिंग पहल एक सतत प्रयास है। इसी प्रकार का जागरूकता सत्र आयोजित करने में रुचि रखने वाले विद्यालय या संस्थान हमारे संकल्प – नशा-मुक्त भारत अभियान के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारे इंस्टाग्राम चैनल पर विज़िट कर सकते हैं:https://www.instagram.com/bodh.djjs/
