Read in English

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन में, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) के लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तिकरण प्रकल्प संतुलन ने 7 फरवरी 2026 को एनसीयूआई ऑडिटोरियम, हौज़ खास, नई दिल्ली में नारी सतयुग लाएगी 2.0 नामक एक अद्वितीय महिला संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में दिल्ली एनसीआर की प्रशासन, शिक्षा, कानून, मीडिया, स्वास्थ्य तथा अन्य अनेक क्षेत्रों की प्रतिष्ठित महिलाओं ने भाग लिया। सभी उपस्थित महिलाएँ शक्ति का सजीव स्वरूप प्रतीत हो रही थीं।

NARI SATYUG LAYEGI 2.0 – a unique women’s conclave organised by DJJS Santulan in New Delhi

कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र दीप प्रज्वलन से हुई जिस मुहूर्त को शोभायमान किया दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ. रश्मि सिंह जी; महाराजा अग्रसेन अस्पताल की अध्यक्षा एवं पंजाबी बाग महिला मंडल की प्रमुख श्रीमती मीना गुप्ता जी; भारतीय सर्वोच्च न्यायालय एवं दिल्ली उच्च न्यायालय की अधिवक्ता सिमरन बरार जी; दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोरिमल कॉलेज की लिंग भू-स्थानिक विशेषज्ञ (gender geo-spatial expert) प्रोफेसर (डॉ.) सीमा मेहरा परिहार जी तथा दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की उच्च शिक्षित एवं आध्यात्मिक रूप से प्रबुद्ध शिष्याएँ, ग्लोबल हेड, डीजेजेएस संतुलन एवं हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में विश्व विख्यात श्री राम कथा वाचक साध्वी दीपिका भारती जी; ग्लोबल हेड, आईटी डिपार्टमेंट, डीजेजेएस, साध्वी जैवानी भारती जी; संजोजिका, दिव्य ज्योति सुर संगम संगीत महविद्यालय, डीजेजेएस साध्वी शैब्या भारती जी |

कला की अद्भुत प्रस्तुतियों ने सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया, आम्रपाली पर आधारित एक प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति ने एक स्त्री के सांसारिक वैभव से आध्यात्मिक जागरण तक की यात्रा को दर्शाया और यह संदेश दिया कि सच्ची मुक्ति अंतर्जगत से आती है। एक ऊर्जावान नृत्य नाटिका ने अंतर्राष्ट्रीय ख्याति संपन्न भारतीय महिला पहलवान अंतिम पंघाल की संघर्षपूर्ण यात्रा को प्रस्तुत किया, जिसमें भारत की बेटियों के साहस, अनुशासन और अटूट संकल्प को दर्शाया गया। संगीत और भावनाओं के बेजोड़ तालमेल के माध्यम से यह प्रस्तुति सामाजिक और व्यक्तिगत बाधाओं को पार करने की प्रेरणा बन गई। टॉक्सिक फेमिनिज्म(विषैला नारीवाद) बनाम महिलाओं की वास्तविक पीड़ा विषय पर आयोजित पैनल चर्चा ने सम्मेलन को वैचारिक गहराई प्रदान की। इस ख़ास पैनल की गरिमा बढ़ाई, डॉ. रश्मि सिंह, अधिवक्ता सिमरन बरार, प्रोफेसर(डॉ.) सीमा मेहरा परिहार तथा दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्याएँ साध्वी दीपिका भारती जी और साध्वी जैवानी भारती जी। चर्चा में यह बात प्रमुखता से उभरी कि समाज को केवल नारीवाद में उलझी वैचारिक बहसों से आगे बढ़कर उन वास्तविक समस्याओं को समाप्त करने की दिशा में काम करना होगा जो आज भी महिलाओ के जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है, जैसे हिंसा और शोषण, कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, शिक्षा के अवसरों की कमी, आर्थिक पिछड़ापन, अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएँ और गहरी जमी हुई सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाएँ।

NARI SATYUG LAYEGI 2.0 – a unique women’s conclave organised by DJJS Santulan in New Delhi

प्रोग्राम का सबसे आकर्षक क्षण दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज की साध्वी शिष्याओं के विशेष बैंड द्वारा प्रस्तुत संगीतमय कार्यक्रम रहा, जिस बैंड की अगुवाई साध्वी दीपिका भारती जी ने की थी। मधुर संगीत और प्रेरक कथाओं के माध्यम से भारतीय इतिहास की वीरांगनाओं जैसे रानी चेन्नम्मा, रानी अबक्का, क्रांतिकारियों जैसे मुला गाभोरू, रानी गैदिन्लिउ, वैदिक विदुषियों जैसे गार्गी, मैत्रेयि और समाज सुधारकों जैसे भगिनी निवेदिता जैसी वैदिक नारियों की गाथाएँ प्रस्तुत की गईं। हर स्वर में ऊर्जा की प्रखरता थी, प्रत्येक कथन में धैर्य और अडिगता की गूँज थी, जो वैदिक नारी की सनातन चेतना को उजागर कर रही थी। दर्शकों को मानो सदियों की यात्रा पर ले जाया गया हो, जहाँ उन्होंने देखा कि भारतीय महिलाएँ सदा से मानव सभ्यता की शिल्पकार, मूल्यों की संरक्षक और परिवर्तन की अग्रदूत रही हैं।

साध्वी जैवानी भारती जी और साध्वी शैब्या भारती जी ने डॉ. रश्मि सिंह जी को स्मृति चिन्ह और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका सम्मान किया। श्रीमती मीना गुप्ता,अध्यक्ष, महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल, अधिवक्ता सिमरन बरार, प्रो. सीमा मेहरा परिहार, डॉ. रितिका यादव, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, एम्स नई दिल्ली और प्रो. सुची मेहरा, चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेजेज को पीयर एजुकेटर के रूप में नियुक्त किया गया।

दिल्ली में आयोजित नारी सतयुग लाएगी 2.0, दिव्य महाकुम्भ प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में आयोजित हुए पहले संस्करण नारी सतयुग लाएगी 1.0 की सफलता से प्रेरित था, जहाँ हजारों महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया था। इस बड़ी भागीदारी ने यह स्पष्ट किया था, कि महिलाओं को संवाद, चिंतन और उच्च उद्देश्य से जुड़ने के लिए ऐसे मंचो की अत्यंत आवश्यकता है।

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की प्रेरणा से डीजेजेएस संतुलन वैदिक नारी के उस स्वरूप को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहा है, जहाँ स्त्री को ज्ञान, करुणा और शक्ति का प्रतीक माना जाता था। इसका लक्ष्य 21वीं सदी की ऐसी महिला का निर्माण है जो आध्यात्मिक रूप से जागृत, बौद्धिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से प्रभावशाली हो।

डीजेजेएस संतुलन पिछले दो दशकों में इस प्रकल्प ने देशभर में अभियानों, कार्यशालाओं और नेतृत्व कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों महिलाओं तक पहुँच बनाई है। आज 6.5 लाख से अधिक महिलाएँ आत्मविश्वास, गरिमा और मूल्यों के साथ आगे बढ़ रही हैं। यह प्रयास संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 5, यानी लैंगिक समानता, की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान है।

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन में डीजेजेएस शिक्षा, जेंडर संवेदनशीलता, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक स्वास्थ्य, आपदा राहत और बंदी पुनर्वास जैसे अनेक क्षेत्रों में समाज सुधार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

डीजेजेएस संतुलन अपने सामाजिक मीडिया मंचों के माध्यम से भी जागरूकता फैलाता है। इस अभियान से जुड़े रहने के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स पर @DJJSSantulan को फॉलो करें और परिवर्तन की इस यात्रा का हिस्सा बनें।

Subscribe Newsletter

Subscribe below to receive our News & Events each month in your inbox