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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की लातूर शाखा द्वारा बीड़, महाराष्ट्र में दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) की कृपा से 25 से 31 अक्टूबर 2025 तक सात दिवसीय श्रीमद देवी भागवत कथा का आयोजन किया गया। इस पावन कथा का उद्देश्य जनमानस में आध्यात्मिक चेतना का जागरण करना था, जिससे व्यक्ति अपने आत्मस्वरूप से जुड़ सके और मानव जीवन के शाश्वत उद्देश्य को समझ सके।

Shrimad Devi Bhagwat Katha acquainted devotees in Beed, Maharashtra with the Eternal Form of Adi Shakti Maa Bhavani

भक्ति रस से ओत-प्रोत भजनों ने पूरे वातावरण को शांति और श्रद्धा से भर दिया, जिससे उपस्थित श्रोताओं के हृदय कथा से प्रवाहित होने वाले दिव्य ज्ञान के अमृत को ग्रहण करने के लिए तैयार हो गए।

कथा का सजीव चित्रण दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की प्रचारक शिष्या, साध्वी अदिति भारती जी द्वारा सरस एवं सारगर्भित शैली में किया गया। साध्वी जी द्वारा कथा में संस्कृत श्लोकों और पवित्र शास्त्रों के संदर्भों को बखूबी पिरोया गया। साध्वी जी ने समझाया कि माँ दुर्गा वह दिव्य शक्ति हैं, जो प्रत्येक जीव के भीतर विद्यमान है- जो बल, बुद्धि और करुणा का अद्वितीय संगम है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने आत्मिक स्वरूप से जुड़ता है, तब वह भय, अहंकार और नकारात्मकता से ऊपर उठ जाता है। माँ दुर्गा की दिव्य ऊर्जा से जुड़ना, आंतरिक शक्ति और परम उद्देश्य को जागृत करता है। यह हमें स्मरण कराता है कि वही शक्ति जो समस्त ब्रह्मांड को संचालित करती है, वह हमारे भीतर भी प्रवाहित हो रही है।

Shrimad Devi Bhagwat Katha acquainted devotees in Beed, Maharashtra with the Eternal Form of Adi Shakti Maa Bhavani

आज के इस अशांत और तीव्र गति वाले संसार में, जहाँ भौतिक इच्छाएँ अक्सर आत्मिक शांति पर हावी हो जाती हैं, आध्यात्मिक स्थिरता की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे समय में, एक पूर्ण आध्यात्मिक गुरु का मार्गदर्शन प्रकाश स्तंभ की भाँति कार्य करता है, जो मनुष्य को उसके सच्चे स्वरूप की ओर वापस ले जाता है। पूर्ण गुरु द्वारा प्रदत्त शाश्वत ब्रह्मज्ञान की विधि से साधक को भीतर ही अपने आराध्य के साक्षात् अनुभव की प्राप्ति होती है। यह पावन जागरण सुप्त दिव्यता को पुनः प्रकाशित करता है। व्यक्ति को स्पष्टता, करुणा और अदम्य शक्ति से जीने में समर्थ बनाता है। 

यह कथा दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के “संतुलन” प्रकल्प (लैंगिक समानता कार्यक्रम) को समर्पित थी, जिसका उद्देश्य समाज में महिलाओं के प्रति सभी प्रकार के भेदभाव और हिंसा को समाप्त करना है। इस कार्यक्रम का मूल सिद्धांत यह है कि महिलाओं के लिए वास्तविक समानता सामाजिक व्यवस्था के समग्र रूपांतरण द्वारा ही संभव है। आत्म-जागरण के माध्यम से ही महिलाएं अपनी महत्ता को जान सकती हैं और पुरूष भी महिलाओं के प्रति सम्मान को स्वीकार कर सकते हैं। 

कार्यक्रम का समापन एक प्रेरणादायी संदेश के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित सभी लोगों से जीवन के उच्च उद्देश्य की खोज करने और सच्चे आध्यात्मिक रूपांतरण का अनुभव करने का आह्वान किया गया। इस आयोजन में डीजेजेएस द्वारा शाश्वत ज्ञान को समकालीन रूप में प्रसारित करने के प्रयासों की सर्वत्र सराहना हुई। अनेक प्रतिभागियों ने डीजेजेएस की भावी योजनाओं में भागीदारी की उत्सुकता दिखाई और उन्हें आंतरिक शांति, आत्मबोध व सार्वभौमिक समरसता हेतु ठोस कदम के रूप में बताया।

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