बढती जल संकट की समस्या को ध्यान मे रखते हुये, विश्व जल दिवस 2019 के उपलक्ष्य मे, संस्थान की करकरडूमा स्थित शाखा ने पूर्वी दिल्ली के जल उपभोक्ताओं को एकत्रित कर 26 मार्च 2019 को एक विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया।
संस्थान के पर्यावरण संरक्षण प्रकल्प संरक्षण के तहत हर साल जल दिवस पर चलाई जाने वाले नीर संरक्षण अभियान के अंतर्गत आयोजित इस चर्चा सत्र मे स्थानीय स्कूलों, बाज़ारों, गैर सरकारी संस्थाओं, गृहणियाँ, स्थानीय वरिष्ठ नागरिक व आवासीय कालोनियों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुये। सत्र की अध्यक्षता संरक्षण प्रकल्प की ऑल इंडिया इंचार्ज साध्वी अदिति भारती व करकरडूमा शाखा की इंचार्ज साध्वी चैतन्या भारती जी ने की।
सत्र का प्रारम्भ देश पर मँडराते जल संकट के भयावह स्वरूप को व्यक्त करके किया गया। NITI आयोग द्वारा जून 2018 मे जारी की गयी विशेष रिपोर्ट मे स्पष्ट प्रमाणित किया गया है कि आज भारत एक गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। यदि जल्द ही कुछ न किया गया तो 2030 तक जल की मांग, उपलब्द जल के स्तर को पार कर जाएगी। 2020 तक देश के 20 मुखी शहरों मे भूमिगत जल का आभाव होजाएगा।
इन सभी आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुये सत्र अध्यक्षा साध्वी अदिति भारती जी ने जल संकट पर जल उपभोक्ताओं की गंभीरता पर प्रश्न उठाते हुये चर्चा को आगे बढ़ाया। इस प्रश्न का उत्तर देते हुये उपस्थित सामाजिक प्रतिनिधियों ने जल से संभित बच्चों, कालोनियों मे रहने वाले नागरिकों, महिलाओं, स्थानीय प्रशासन के लोगों की सोच व व्यवहार को व्यक्त किया।
लगभग डेड घंटे तक चली इस चर्चा मे यह स्पष्ट रूप से सामने आया की लापरवाही, आम नागरिक व प्रशानिक संस्थाओं कि, यही जल संसाधन के अपव्यय का सबसे बड़ा कारण है।
आज आवश्यकता है एक आम उपभोक्ता के जागरूक होजाने के की और प्राचीन भारत की तरह अपने जल संसाधन को स्वयं संरक्षित व संवर्धित करने की। सभी ने इस बात पर सहमति जताते हुये सत्र के अंत मे संगठित प्रयास करने का और जन जन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का संकल्प उठाया।
संस्थान गत पाँच वर्षों से जल दिवस पर देशभर मे नीर संरक्षण अभियान के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण व संवर्धन के लिए प्रोत्साहित व प्रशिक्षित करती आरही है।

