DJJS संतुलन, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) की लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण प्रकल्प को 13 मार्च 2026 को इंदस विश्वविद्यालय, अहमदाबाद में “सुपरवुमन: सराहना या बोझ?” विषय पर एक विचारोत्तेजक जेंडर सेंसिटाइजेशन कार्यशाला आयोजित करने हेतु आमंत्रित किया गया था। इस कार्यशाला में “सुपरवुमन सिंड्रोम” जैसे दिखने में सरल परंतु समझने में जटिल विषय को बहुत सहज ढंग से स्पष्ट किया गया, जिसमें आधुनिक समाज में महिलाओं से बढ़ती अपेक्षाओं और इसके पीछे छिपे अक्सर अनदेखे मनोवैज्ञानिक दबाव पर प्रकाश डाला गया।

कार्यशाला में विद्यार्थियों और शिक्षकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। इंटरैक्टिव गतिविधियों और प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभागियों को जेंडर भूमिकाओं, सामाजिक प्रभाव से बनी धारणाएं और अनेक जिम्मेदारियों को एक साथ संभालने का मौन दबाव पर गहराई से सोचने के लिए प्रेरित किया गया।
इसी विषय पर आधारित एक प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही, जिसने “सुपरवुमन” बनने की अपेक्षाओं के बीच महिलाओं के दैनिक संघर्षों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने यह उजागर किया कि यह छवि, जिसे अक्सर गर्व के प्रतीक के रूप में देखा जाता है और दूसरों की प्रशंसा से और मजबूत होती है, वास्तव में कितनी त्रुटिपूर्ण है। लगातार अधिक करने और हर भूमिका में श्रेष्ठ बनने के दबाव को दर्शाते हुए इसने हसल कल्चर की बढ़ती प्रवृत्ति पर प्रश्न उठाया और इसके पीछे छिपे मौन बोझ को सामने रखा। “क्योंकि तुम लड़की हो” शीर्षक से प्रस्तुत एक आकर्षक कोरियोग्राफी ने समाज की अपेक्षाओं के बीच अपनी पहचान खोजती महिलाओं की भावनात्मक यात्रा को दर्शाया। “क्या आप वह सुपरमैन हैं जो एक सुपरवुमन का सहयोग कर सके?” इस रोचक गतिविधि के माध्यम से विशेष रूप से पुरुष प्रतिभागियों को जागरूक और संवेदनशील बनाने का प्रयास किया गया। यह संदेश दिया गया कि जेंडर संवाद को सफल बनाने और संतुलन स्थापित करने के लिए आवश्यक है कि समाज समग्र रूप से महिलाओं के वास्तविक मुद्दों को समझे और स्वीकार करे।

कार्यशाला को और समृद्ध बनाया साध्वी अदिति भारती जी, दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या के प्रेरक संबोधन ने। उन्होंने देवी छिन्नमस्ता के केस स्टडी के माध्यम से यह समझाया कि कैसे एक नारी विपरीत परिस्थितियों में भी सौम्यता, शक्ति और आंतरिक संतुलन का प्रतीक बन सकती है। साध्वी जी ने इस बात पर बल दिया कि सच्चा सशक्तिकरण बाहरी पहचान में नहीं, बल्कि आत्म-जागरूकता में निहित है। #couplegoals शीर्षक से एक रोचक सत्र में उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों के माध्यम से यह बताया कि परस्पर सम्मान, साझेदारी और संवेदनशीलता ही एक संतुलित समाज की नींव हैं। साध्वी जी ने आगे इस बात पर ज़ोर दिया कि एक मजबूत सहयोग प्रणाली होनी चाहिए, जहाँ जिम्मेदारियाँ मिलकर निभाई जाएँ, ताकि कर्तव्य कभी किसी के लिए भी बोझ न बनें ऐसी परिस्तिथि में एक महिला “सुपरवुमन” बनने का दबाव धीरे-धीरे कम महसूस करने लगती है और वह इस अनदेखे बोझ को उतारकर अपने जीवन को सहजता, संतुलन और आत्मविश्वास के साथ जीने लगती है । कार्यक्रम के समापन पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा साध्वी अदिति भारती जी को सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
इंदस यूनिवर्सिटी के साथ इस सफल सहयोग के माध्यम से DJJS संतुलन ने भविष्य की पीढ़ियों को तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है, जो लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को समझें, आत्मसात करे और आगे बढ़ाएं तथा जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।
पिछले दो दशकों में DJJS संतुलन भारत की अग्रणी महिला सशक्तिकरण पहलों में से एक बनकर उभरा है और अपने विभिन्न अभियानों और व्यापक कार्यक्रमों के माध्यम से देशभर में 6.5 लाख से अधिक महिलाओं को सशक्त बना चुका है, जिससे संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 5 के अनुरूप लैंगिक समानता को बढ़ावा मिला है।
दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की प्रेरणा से DJJS शिक्षा, लैंगिक जागरूकता, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक स्वास्थ्य, आपदा राहत और कारागार सुधार जैसे क्षेत्रों में बहुआयामी सामाजिक कार्यों के माध्यम से विश्व में शांति, समानता और समरसता स्थापित करने के अपने उद्देश्य की ओर निरंतर अग्रसर है।
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